सेल्समैन की नौकरी छोड़ शुरू की नींबू की खेती, अब लाखों में कमाई

by user

मध्यप्रदेश के सतना जिले के पोइंधा कला गांव के किसान अभयराज सिंह को दुनियादारी से ज्यादा अपने खेत और लहलहाते पौधों की फ्रिक है। उन्होंने साल 2005 में सहकारी समिति की सरकारी नौकरी छोड़ दी और हिस्से में आई एक हेक्टेयर से भी कम जमीन पर खेती करनी शुरू की।

अभयराज सिंह ने पारंपारिक खेती की जगह फल उगाने का क्रम शुरू किया। वह बताते हैं, “सहकारी समिति में सेल्समैन की नौकरी करते समय पांच उचित मूल्य की दुकानों का जिम्मा था इसके बाद भी तनख्वाह वही 15 हजार, इससे पत्नी और दो बच्चों का गुजारा ही चल रहा था। आगे कोई भविष्य नहीं दिख रहा था सो नौकरी छोड़ दी यह सोचे बिना कि आगे क्या करूंगा पर अपने हौसलों को टूटने नहीं दिया। फिर फलों की खेती शुरू कर दी। इसी के दम पर आज अभयराज सिंह ने अपना मकान पक्का करा लिया, बिटिया की शादी कर ली।”

बात वर्ष 2008 की है जब इस खेत में नींबू के मात्र 20 पौधे लगाए थे। आज 300 पेड़ हैं। तब महज 50 रुपए ही खर्च हुए थे। नींबू का पेड़ तैयार होने में करीब 3 साल लग जाते हैं। इसलिए इंटर क्रॉपिंग के लिए गन्ना भी लगा दिया था। इससे यह फायदा हुआ कि परिवार के सामने भरण पोषण का संकट नहीं आया। जब नींबू के पेड़ तैयार हो गए तो इंटर क्रॉपिंग बंद कर दी। उन 20 पेड़ों से तब करीब 25 से 30 हजार रुपए कमाए थे।

अभयराज कहते हैं कि नींबू एक ऐसा पेड़ है जिसे बाहरी जानवरों और पक्षियों से कोई खतरा नहीं है। चिड़िया भी आकर बैठ जाती है पर कभी चोंच नहीं मारतीं। गांव के आसपास आम के बगीचे हैं जिससे बंदर भी आते हैं। इनसे पपीता, गन्ना और अन्य सब्जियों को खतरा रहता है पर नींबू को छूते तक नहीं इसलिए खेती करना आसान हुआ।

सालाना उत्पादन के बारे में अभयराज बताते हैं कि नींबू के एक पेड़ में 3 से 4 हजार फल आते हैं। इस हिसाब से 300 पेड़ों में करीब 1 लाख नींबू आते हैं। इनकी एक रुपए भी कीमत लगाई जाय तो 1 लाख रुपए होती है। गांव से करीब 16 किलोमीटर दूरी पर सतना शहर है जहां उपज बेचाता हूं। खुली मंडियों की जगह शहर के 6 होटलों और इतने ही ढाबों में सप्लाई है। यहां पैसा फंसने की गुंजाईश कम है इसलिए ज्यातादर होटलों और ढाबों को ही नींबू सप्लाई करता हूं।

You may also like

Leave a Comment

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More