मनरेगा के लिए केंद्र सरकार ने दिए 40 हजार करोड़ रुपए

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कोरोना संकट को देखते हुए केंद्र सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में 40,000 करोड़ रुपए के अतिरिक्त बजट का देने का ऐलान किया। इस साल बजट में केंद्र सरकार ने मनरेगा के तहत 61,000 करोड़ रुपए के बजट की घोषणा की थी और अब मनरेगा में 40 हज़ार करोड़ रुपए के अतिरिक्त बजट की घोषणा की गई। इस तरह मनरेगा के तहत कुल बजट एक लाख करोड़ रूपये से ऊपर हो गया।

केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला ने कहा कि इस बजट के बाद कुल 300 करोड़ मानव दिवस काम के पैदा किए जा सकेंगे। हालांकि जानकारों ने मनरेगा में केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त बजट दिए जाने का स्वागत किया है लेकिन उन्होंने कुछ सवाल भी उठाए हैं।

उत्तर प्रदेश में मनरेगा में लम्बे समय से मजदूरों के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहीं और संगठित किसान मजदूर संगठन से जुड़ीं ऋचा सिंह मनरेगा में अतिरिक्त बजट बढ़ाये जाने के फैसले का स्वागत करती हैं। मगर कोरोना संकट के बीच लौट रहे प्रवासी मजदूरों को जमीनी स्तर पर मनरेगा में काम मिलने को लेकर वह सवाल उठाती हैं।

ऋचा कहती हैं, “आज जिस गाँव में कभी 50 लोग मनरेगा में काम करते थे आज उसी गाँव में 300 लोगों की मनरेगा में काम की डिमांड आ रही है। ये वही लोग हैं जो काम के लिए दूसरे शहरों में जाते थे। ऐसे में जमीनी स्तर पर अभी भी कई दिक्कतें हैं।”

झारखण्ड में मनरेगा के कामों से जुड़े और नरेगा संघर्ष मोर्चा में लम्बे समय से काम कर रहे देबमाल्या नंदी ‘गाँव कनेक्शन’ से बताते हैं, “निश्चित रूप से मनरेगा में 40 हज़ार करोड़ का अतिरिक्त बजट दिया जाना सराहनीय है। सरकार की कोशिश है कि लौट रहे प्रवासी मजदूरों को काम मिले, मगर मजदूरों को आर्थिक रूप से मजबूती और लम्बे समय तक रोजगार देने के लिए सरकार को 100 दिन रोजगार की गारंटी को बढ़ाकर 150 से 200 दिन करना चाहिए।”

अभी तक मनरेगा के तहत ग्रामीण लोगों को घर के पास ही साल में 100 दिन रोजगार मुहैया कराने का प्रावधान किया गया है। हालांकि कुछ राज्य सरकारें पहले से ही मनरेगा में गांव के लोगों को साल में 150 दिन का रोजगार उपलब्ध करा रही हैं।

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